Saty Prasad
11 साल 3 सप्ताह पहले
जन्म से सभी शुद्र हैं।
संस्कार से क्षुद्रता कम होती है।
ज्ञानार्जन से ब्यक्ति जीविकोपार्जन के लिए समर्थ होता है।
जो अपना बुद्धि चातुर्य विवेक इस्तेमाल नहीं कर पाता- सेवक बन जाता है।
जो बुद्धि चातुर्य से सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में समर्थ होता है-वैश्य बन जाता है।
उससे समर्थ सामजिक सुरक्षा का दायित्व लेने वाले क्षत्रिय बन जाते हैं।
और उन सबसे समर्थ ज्ञान दान करने की विधा में लगते हैं जिससे की आने वाली पीढ़ियों को उत्तम ज्ञान प्राप्त हो सके। पशु से मानव बन सके।
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