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आरंभ करने की तिथि :
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अंतिम तिथि :
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Nirmal Kumar Das
5 साल 3 महीने पहले
Johar Sir,
A big fan of yours & is very enlighted to share my thoughts which is only possible because of your efforts in involving citizens in policy making. Sir, I would like to draw your attention towards the SSC exams & other Government exams. The exams conducted by respective bodies are very idle, they don't take anything serious let it be conduction of exam, declaration of results & selection. The Govt. needs to immediately revamp these bodies & make them accountable of all its actions.
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vikrant nautiyal
5 साल 3 महीने पहले
देश के लोकप्रिय प्रधान मंत्री जी. और हम देश वासियो के सपने साकार करने वाले बाबा केदारनाथ के भक्त.. मोहदये मुझे इस बाद का खेद है अगर में भार जाता हु या किसी पार्क में जाता हु. या किसी सार्वजनिक शौचालीय बहुत गन्दा रहता है. उसकी ना कोई देख करता है ना कोई सुध.. शहर की साफ सफाई की जिम्मेदारी. नगरनिगम और नगरपालिका अपने कर्त्तवियों में खरे नही उतरती है. और सबसे importent बात.. जो रोड में लाइट जलती है. कही कही तो वो दिन रात जलती रहती है ऐसा देख कर बहुत बुरा लगता है...जय श्री raam
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narender singh
5 साल 3 महीने पहले
Respected sir
With the help of Karyakarta, I laid down the foundation of BJP in 1989 of Pangi (Mandal), Tehsil Pangi in1989, District Chamba and working for the development of this region. Based on local knowledge & being the resident of Tehsil Pangi, District Chamba, I am suggesting an alternate shorted route for Leh via Zanskar from Pangi Valley, which will to connect Pathankot & Jammu. The details have been mentioned in the attached letter. Bhani Chand , Pangi Chamba
mygov_161660652286754961.pdf
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DR Vinay Mishra
5 साल 3 महीने पहले
मेरी समझ से परे है, हिंदी माध्यम को तवज्जो नहीं दी जाती है, UPSC और सरकार द्वारा सिविल सेवा छटनी मे, परन्तु हिंदी राज्यों के कैडर को अधिकांश अंग्रेजी सफल छात्र क्यों चुनते .?
मेरे सामने 2 उदाहरण आये एक दक्षिण भारत की IAS को मंसूरी में 3 महीने हिंदी क्यों पढ़ाई जाती..? दूसरा दक्षिण भारत के कैडर लेने पर मलयालम, तमिल, कन्नड़, आदि क्यों पढ़ाई जाती..?
अंग्रेजी से काम क्यों नहीं चलता ...?
फिर क्या फायदा अंग्रेजी माध्यम के ढांचे को उपयोग कर हिंदी माध्यम के लोगों का शोषण कब तक होता रहेगा..?
हैरानी की बात
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Aaditya Shukla
5 साल 3 महीने पहले
Respected Sir,
I am 15 and have developed a skill in programming and I am interested in Machine learning. It would be really great if you could encourage coding between teens.
regards,
Aaditya Shukla
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Suneel neekhra
5 साल 3 महीने पहले
Respected Sir,
I have written a peom on lockdown Corona for Mann ki baat to encourage people to wear a mask and maintain social distancing.
regards,
Suneel Neekhra,
7888358151
Panchkula (HR)
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MUNEEM SAHU
5 साल 3 महीने पहले
माननीय प्रधानमन्त्री जी,
स्नेहिल सादर प्रणाम।।
माननीय प्रधानमन्त्री जी आपसे विनम्र आग्रह की हम म. प्र. के शासकीय शिक्षकों को पुरानी पेंशन सिस्टम लागू करने की क्रपा करें ताकि बुढ़ापे का कुछ साहारा मिल सके।
हमें आशा हैं कि आप हमारी मनोकामना पूर्ण करेंगे ।
आपका
समस्त शिक्षक जगत
म.प्र.
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Dr Pradip Aujekar
5 साल 3 महीने पहले
सर नमस्ते मेरा नाम डॉ. प्रदीप औजेकर है| मैं किसान कला, वाणिज्य और विज्ञान महाविद्यालय, पारोला मे सहायक प्राध्यापक हूं| जबसे कोरोना महामारी सुरू हुयी है, मैने एके आवाहन पर सामान्य नागरिकोकि सेवा की है| मैं राष्ट्रीय सेवा योजना का सहायक अधिकारीभी हूं, मैने अपने स्वयंसेवक द्वारा अनेक गतीविधियोमे भाग लिया है| जबसे कोरून लसीकरण सुरू हुवा है, हमारे NSS युनिट ने लसीकरण मे आपना सहयोग दिया है, मैं खुश हूं की भारत सरकारकी इस महत्वपूर्ण योजना का मैं भागीदार हूं| बस एक दुःख है, यहा जहाँ मैं काम कर रहा हूं व
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Parul sahu
5 साल 3 महीने पहले
Respected sir, I am parul.I want to make this country developed.The main reason of it is superstitions.Nobody understands that these superstitions are making them week from inside and outside to.All are only scared of going to hell.Not only I butmany more girls know that these superstitions are wrong but they following it due to the fear of society.Due to these superstitions there is still inequality in gender.Sir manymore girls need your helpto take out this society from this word superstitions
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gulab Salunke
5 साल 3 महीने पहले
માનનીય મોહદય સાહેબ આપ ભલે હિ લોકડાઉન લગાયે પર હમારે ખાતે મૈ મહિને કે500રૂપયે બહુત કમ હૈ 3000હજાર રૂપયે દિજિએ ફિર લોકડાઉન લગાઇગા ધન્યવાદ આપકા શુભ ચિંતક .ગુલાબ સાળુંકે
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