Inviting comments and suggestions on the Draft Accessibility Standards for the Products Sector

आरंभ करने की तिथि :
Aug 14, 2025
अंतिम तिथि :
Sep 14, 2025
17:30 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
The Department of Empowerment of Persons with Disabilities (DEPwD), Ministry of Social Justice & Empowerment (MSJE), in collaboration with MyGov, invites comments and suggestions ...
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
कुटीर उद्योग गांवों में अधिक लोकप्रिय क्यों हैं?
गाँव में कुटीर उद्योग समय के साथ विकसित हो सकता है क्योंकि निवासी स्थानीय बाज़ारों में बिक्री या निर्यात के लिए शिल्पकला का उत्पादन करने के लिए एक साथ आते हैं।
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
ग्रामीण क्षेत्रों में कौन-कौन से उद्योग हैं?
ग्रामीण उद्योगों में मुख्य रूप से कृषि-आधारित उद्योग जैसे मुर्गी पालन, मछली पालन, फल-सब्जी की खेती व प्रसंस्करण, और खादी-ग्रामोद्योग शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ईंट निर्माण, बढ़ईगिरी, हस्तशिल्प (जैसे फर्नीचर, कालीन, मिट्टी के बर्तन), खाद्य प्रसंस्करण (अचार, बेकरी, डेयरी), और सेवाओं से जुड़े उद्योग जैसे साइकिल मरम्मत, किराना स्टोर, और मोबाइल/इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें भी महत्वपूर्ण हैं।
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
7. पश्चिमीकरण का प्रभाव:-
पश्चिमी देशों की संस्कृति और उत्पादों का प्रभाव भी भारत में कुटीर उद्योगों के पतन का एक कारण रहा है, क्योंकि लोग विदेशी वस्तुओं के प्रति आकर्षित हुए।
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
5. प्रतिस्पर्धा:-
कुटीर उद्योग बड़े पैमाने के उद्योगों और आयातित उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते, क्योंकि वे बड़े पैमाने पर उत्पादन की अर्थव्यवस्थाओं से वंचित होते हैं।
6. सरकारी नीतियाँ और नियम:-
कभी-कभी सरकारी नियम और नीतियां भी कुटीर उद्योगों के विकास में बाधा डाल सकती हैं।
कई उद्यमी सरकारी योजनाओं और नीतियों के बारे में जागरूक नहीं होते या उन्हें आवश्यक सहायता नहीं मिल पाती।
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
4. कच्चे माल और विपणन की समस्याएँ:-
कई बार कच्चे माल की अनुपलब्धता, खासकर मौसमी उत्पादों के लिए, एक बड़ी समस्या होती है।
उत्पादित वस्तुओं के लिए उचित और संगठित विपणन नेटवर्क की कमी होती है, जिससे उन्हें बाजार में बिक्री के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
2. तकनीकी और आधारभूत ढाँचे की कमी:-
इन उद्योगों में आधुनिक और कुशल तकनीकों का अभाव होता है, जिससे उत्पादकता कम होती है।
बिजली, पानी, परिवहन और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी, खासकर ग्रामीण इलाकों में, उत्पादन और संचालन को बाधित करती है।
3. प्रबंधकीय और कौशल संबंधी चुनौतियाँ:-
कुटीर उद्योगों में कुशल प्रबंधन की कमी होती है, जिससे व्यवसाय का उचित संचालन नहीं हो पाता।
तकनीकी बदलावों को अपनाने के लिए आवश्यक कौशल की कमी भी उनके विकास में बाधा डालती है।
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
कुटीर उद्योगों की प्रमुख समस्याएं:-
1. वित्तीय समस्याएँ:-
कुटीर उद्योगों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में ऋण आसानी से उपलब्ध नहीं होता।
सरकारी और बैंक ऋण प्रणालियाँ अक्सर जटिल होती हैं, जिससे छोटे उद्योगों के लिए ऋण प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है।
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
कुटीर उद्योगों के सामने कौन-कौन सी समस्याएं आती हैं?
कुटीर उद्योगों की मुख्य समस्याएं अपर्याप्त पूंजी, आधुनिक तकनीक की कमी, कच्चे माल की सीमित उपलब्धता, कुशल प्रबंधकीय ज्ञान की कमी, सरकारी नीतियों और नियमों की बाधाएं, बड़े उद्योगों और आयातित उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा, तथा सीमित और असंगठित विपणन नेटवर्क हैं। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, पानी और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी उनके विकास में बाधक है।
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
7. स्थानीय उत्पादन और सेवाएं:-
कुटीर उद्योग स्थानीय ज़रूरतों को पूरा करने वाली वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और मज़बूत होती है।
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BrahmDevYadav
10 महीने 2 सप्ताह पहले
4. स्थानीय अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण:-
ये उद्योग स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हैं, स्थानीय बाज़ारों को बढ़ावा देते हैं, और स्थानीय समुदायों में धन के समान वितरण को बढ़ावा देते हैं।
5. विकेन्द्रीकृत विकास:-
बड़े उद्योगों पर निर्भरता कम करके, कुटीर उद्योग देश के आर्थिक विकास को छोटे और स्थानीय स्तर पर फैलाने में मदद करते हैं।
6. महिला सशक्तिकरण:-
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं कुटीर उद्योग अपनाकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकती हैं, जिससे वे सशक्त बनती हैं और गरीबी के चक्र से बाहर निकल पाती हैं।
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