Dayakrishan Pandey
3 years 4 months ago
सनातन संस्कृति के कई पर्यायवाची हो सकते हैं जैसे वासुधैव कुटुम्बक सर्व धर्म समभाव संतुलन अनादि अनंत आदि आदि जिस स्वर्ण सिंहासन पर बैठ कर महाराज अष्टावक्र जी महाराज ने विदेही होने का मंत्र दिया था उनके द्वारा दिया उपदेश आज के राजनेता अंश मात्र भी पालन कर लें तो रामराज्य की तरफ जाया जा सकता है रामराज्य की परिभाषा विस्तृत है परंतु राजनेता उसका अंश मात्र भी पालन कर ले तो सुधार हो सकता है एक रेखा को बिना मिटाए छोटा करने के लिए उसके समानांतर लंबी रेखा खीचनी जरूरी है
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